सुबह कुछ और शाम को कुछ और तबीयत रहती है | शायरी | करन‌ मिश्रा
सुबह कुछ और शाम को कुछ और तबीयत रहती है | शायरी | करन‌ मिश्रा

सुबह कुछ और शाम को कुछ और तबीयत रहती है | शायरी | करन‌ मिश्रा

सुबह कुछ और शाम को कुछ और तबीयत रहती है,
ऐ हुस्न तेरे इश्क में दिल की ऐसी हालत होती है,
तू दिखे तो खिल जाती है धूप अपने प्यार,
तू ना दिखे तो आखों से सावन की बारिश होती है।

Subah Kuchh Aur Sam Ko Kuchh Aur Tabiyat Rahati Hai,
Ai Husn Tere Ishq Me Dil Ki Aisi Halat Hoti Hai,
Tu Dikhe To Khil Jati Hai Dhup Apne Pyar,
Tu Na Dikhe To Aakhon Se Sawan Ki Barisha Hoti Hai.

सुबह कुछ और शाम को कुछ और तबीयत रहती है | शायरी | करन‌ मिश्रा
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Karan Mishra

करन मिश्रा को प्रारंभ से ही गीत संगीत में काफी रुचि रही है । आपको शायरी, कविताएं एवं‌‌ गीत लिखने का भी बहुत शौक है । आपको अपने निजी जीवन में मिले अनुभवों के आधार पर प्रेरणादायक विचार एवं कहानियां लिखना काफी पसंद है । करन अपनी कविताओं एवं विचारों के माध्यम से पाठको, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने का प्रयत्न करते हैं ।

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