लगता है वो मरे नहीं कि जान उनमें बाकी है | शायरी | करन‌ मिश्रा
लगता है वो मरे नहीं कि जान उनमें बाकी है | शायरी | करन‌ मिश्रा

लगता है वो मरे नहीं कि जान उनमें बाकी है | शायरी | करन‌ मिश्रा

जिन ख्वाबों पर पाँव रखकर तुम चले गए जाने कहाँ,
लगता है वो मरे नहीं कि जान उनमें बाकी है।
लेते हैं जाग जागकर वो रातभर सिसकियाँ,
लगता है उनमें जीने का अरमान अभी बाकी है।

Jin Khwabon Par Paw Rakha Kar Tum Chale Gaye Jane Kahan,
Lagata Hai Vo Mare Nahi Ki Jaan Unme Baki Hai.
Lete Hain Jaag Jaagkar Vo Raatbhar Sisakiyan,
Lagata Hai Unme Jeene Ka Armaan Abhi Baki Hai.

लगता है वो मरे नहीं कि जान उनमें बाकी है | शायरी | करन‌ मिश्रा
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Karan Mishra

करन मिश्रा को प्रारंभ से ही गीत संगीत में काफी रुचि रही है । आपको शायरी, कविताएं एवं‌‌ गीत लिखने का भी बहुत शौक है । आपको अपने निजी जीवन में मिले अनुभवों के आधार पर प्रेरणादायक विचार एवं कहानियां लिखना काफी पसंद है । करन अपनी कविताओं एवं विचारों के माध्यम से पाठको, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने का प्रयत्न करते हैं ।

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