निखरने की उमर है ये संवरने की उमर है ये | शायरी | करन मिश्रा
निखरने की उमर है ये संवरने की उमर है ये | शायरी | करन मिश्रा

निखरने की उमर है ये संवरने की उमर है ये | शायरी | करन मिश्रा

निखरने की उमर है ये संवरने की उमर है ये,
हुस्न के जलवों से दीवाना करने की उमर है ये ।
जवानी है ये जब तक हुस्न के जलवों में बरकत है,
जवानी के अगन में यार बरने की उमर है ये।

Nikharane Kee Umar Hai Ye Sanvarane Kee Umar Hai Ye,
Husn Ke Jalavon Se Deevaana Karane Kee Umar Hai Ye .
Javaanee Hai Ye Jab Tak Husn Ke Jalavon Mein Barakat Hai,
Javaanee Ke Agan Mein Yaar Barane Kee Umar Hai Ye.

निखरने की उमर है ये संवरने की उमर है ये | शायरी | करन मिश्रा
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Karan Mishra

करन मिश्रा को प्रारंभ से ही गीत संगीत में काफी रुचि रही है । आपको शायरी, कविताएं एवं‌‌ गीत लिखने का भी बहुत शौक है । आपको अपने निजी जीवन में मिले अनुभवों के आधार पर प्रेरणादायक विचार एवं कहानियां लिखना काफी पसंद है । करन अपनी कविताओं एवं विचारों के माध्यम से पाठको, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने का प्रयत्न करते हैं ।

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