सरगम के सात सुरों सारेगामा में है सफलता का मंत्र दोस्तों संगीत के साथ सात सुर, जिन्हें सरगम के सात सुरों के नाम से भी जाना जाता है जो इस प्रकार हैं, सा, रे, ग, म, प, ध और नि, से आप भली-भांति परिचित होंगे परंतु क्या आप इन सात सुरों के बारे में एक […]
बहुत ज्यादा शांति का होना किसी बड़े तूफान के आने का संकेत हो सकता हैं । समुद्र तट पर आज कुछ ऐसा ही नजारा साफ देखा जा सकता है । चारों तरफ का वातावरण बहुत शांत है । तभी अचानक वहां बहुत जोर की आंधि चलने लगती है । इस आंधी में समुद्र के तट […]
कल रात दो समुदायों के लोगों के बीच में थोड़ी झड़प हो गई है जिसके कारण शहर में तनातनी का माहौल है । आज संडे का दिन है सुबह के 10:00 बज रहे हैं परंतु मृदुल चद्दर ताने कुछ ऐसे सोया है मानो वह बीते 6 दिनों की थकान आज निकाल कर ही दम लेगा […]
खुशहालपुर गांव में जहां हर तरफ बस खुशियां ही खुशियां बिखरी हुई हैं । वहीं गांव में रहने वाला दुखिया गांव का एकमात्र दुखी इंसान है । हालांकि उसका दुखी होना भी बिल्कुल वाजिब है क्योंकि उसके पास रहने के लिए न सर पर छत है, ना ही पहने के लिए दो जोड़ी कपड़े और […]
छुट्टियों में अपने माता-पिता के साथ गांव आए दिनेश को गांव की प्राकृतिक सुंदरता बहुत भा रही है परंतु गांव में उसका कोई हमउम्र नही है जिसके कारण उसे एक अच्छी कंपनी नहीं मिल पा रही है । दिनेश के आस-पड़ोस में या तो बहुत उम्रदराज लोग हैं या तो फिर छोटे बच्चे हैं जिसके […]
महाशिवरात्रि का महापर्व जहां हर साल की तरह इस साल भी, गांव से थोड़ी दूर स्थित पुराने शिव मंदिर के पास एक विशाल मेला लगा है । राधे और मोहन भी मेले का लुत्फ उठाने मेले में पहुंचते हैं । वहां पहुंचकर वे मेले मे लगे झूलो और लजीज व्यंजनो का आनंद उठा रहे हैं […]
Writer जितेंद्र कुमार भूपेश आप M.Sc , B.Ed , CSIR NET-JRF, GATE in Life sciences और Ph.D scholar MGSU, बीकानेर हैं । आप V.P.O. माधोगढ़, टेक्निकल क्षेत्र, जिला – झुंझुनू राजस्थान में कार्यरत हैं । आपको प्रेरणादायक कविताएं लिखना बहुत पसंद है । यदि आप के पास कोई कहानी, शायरी , कविता विचार या कोई जानकारी ऐसी है जो आप […]
सुमित बचपन से बहुत आज्ञाकारी व मेहनती बच्चा था लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, ऐसे लडको के साथ रहने लगा जो बिगडे हुए थे । ऐसे में उसके मां – बाप उसे समझाते परंतु उनका उस पर कोई असर नही होता । परिक्षा की घड़ी आ गई और वह फेल हो गया । ऐसे में […]
मां मेरे शूज पापा की तरह बड़े-बड़े क्यों नहीं हैं ? ये इतने छोटे-छोटे क्यूं हैं ? बच्चे के मासूम सवालों को सुनकर संगीता हंस पड़ती है वह कहती है मेरा बाबू, अभी छोटू सा है ना इसीलिए उसकी शूज भी छोटी सी है वह जैसे-जैसे बड़ा होने लगेगा, वैसे-वैसे हम उसके लिए बड़ी शूज […]
कोमौलिका अपने माता-पिता की बड़ी लाडली बेटी थी । कमौलिका के माता पिता एक सेठ के वहां पैकिंग का काम किया करते थे । वे सेठ की दुकान से अनाज की बोरियां लाते और फिर उसे छोटे-छोटे प्लास्टिक के थैलों में पैक करके उसे सेठ की दुकान पर वापस दे आया करते । सेठ उन्हें […]
