नींद आती नहीं तकिये पर मुझे | शायरी | करन‌ मिश्रा
नींद आती नहीं तकिये पर मुझे | शायरी | करन‌ मिश्रा

नींद आती नहीं तकिये पर मुझे | शायरी | करन‌ मिश्रा

मुझे नखरे ना दिखाया करो,
चुप-चाप चली आया करो,
नींद आती नहीं तकिये पर मुझे,
अपनी बाहों में सुलाया करो.

इतना ना इतराया करो,
मुझे देखकर मुस्कुराया करो.
डर लगता है बहुत गुस्से से तेरे,
मुझे आखें ना दिखाया करो.

ज्यादा देर ना लगाया करो,
तुम झट से मान जाया करो.
जी लगता नहीं मेरा तेरे बगैर,
देर तक मुझसे दूरी ना बनाया करो।

मेरी धड़कने बन जाया करो,
मेरे सीने से लग जाया करो,
आकर पास मेरी सांसों को,
अपने खुशबुओं से महकाया करो।

Mujhe Nakhare Na Dikhaya Karo,
Chup Chap Chali Aaya Karo,
Nind Aati Nahi Takiye Par Mujhe,
Apni Bahon Me Sulaya Karo.

Itna Na Etaraya Karo,
Mujhe Dekhkar Mushakuraya Karo.
Dar Lagata Hai Bahut Gusse Se Tere,
Mujhe Aakhein Na Dikhaya Karo.

Jyada Der Na Lagaya Karo,
Tum Jhat Se Man Jaya Karo.
Ji Lagata Nahi Mera Tere Bagair,
Der Tak Mujhse Duri Na Banaya Karo.

Meri Dhadakane Ban Jaya Karo,
Mere Seene Se Lag Jaya Karo,
Aakar Pas Meri Sanson Ko,
Apne Khushboovon Se Mahakaya Karo.

नींद आती नहीं तकिये पर मुझे | शायरी | करन‌ मिश्रा
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नींद आती नहीं तकिये पर मुझे | शायरी | करन‌ मिश्रा
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Karan Mishra

करन मिश्रा को प्रारंभ से ही गीत संगीत में काफी रुचि रही है । आपको शायरी, कविताएं एवं‌‌ गीत लिखने का भी बहुत शौक है । आपको अपने निजी जीवन में मिले अनुभवों के आधार पर प्रेरणादायक विचार एवं कहानियां लिखना काफी पसंद है । करन अपनी कविताओं एवं विचारों के माध्यम से पाठको, विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने का प्रयत्न करते हैं ।

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