एक गांव मे एक किसान रहता था । किसान बहुत गरीब था वह और उसकी पत्नी हमेशा पैसे पैसे के लिए परेशान थे । किसान की औरत उससे कहती “क्या हम पूरी जिंदगी ऐसे ही दुखों के साथ बिताएंगे। क्या हमारी जिंदगी में कभी खुशियां नहीं आएंगी”
“इतना परेशान मत हो धैर्य रखो। ईश्वर इतना निर्दई नहीं हो सकता आज नहीं तो कल वह हमारी जरूर सुनेगा। वो एक दिन हमारे सारे दुख दूर कर देगा और हमारा जीवन खुशियों से भर देगा। वह इतना निर्दई नहीं हो सकता”
पति की यह बात सुनकर पत्नी भी आधे मन से उसकी बातों को मान लेती और कहती “उम्मीद है, जैसा तुम कह रहे हो वैसा ही हो”
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जमीदार के मुख से ऐसा सुनकर किसान खुशी से उछल गया।उसने जमीदार को तथा ईश्वर को धन्यवाद दिया। घर आकर जब उसने पत्नी को ये सारी बातें बताई। तो पत्नी ने कहा आज “आप नहीं आपके अटल विश्वास की जीत हुई है”
उसको सोने के लालच से ज्यादा कृषि योग्य भूमि को खो देना और फिर से गरीब हो जाने कि चिंता थी । अगले दिन चारों मित्र पास के खेत में छुप कर किसान पर नजर गड़ाए हुए थे। किसान सुबह उठा और अपना फावड़ा लेकर उसी खेत में जा पहुंचा।
किसान ने कहा “ऐसी कोई बात नहीं। बस थोड़ा काम ज्यादा हो जाने से थकान है और कुछ नहीं तुम सो जाओ”
किसान ने पत्नी को मनाने की बहुत कोशिश की पर उसकी पत्नी की जिद्द के आगे उसकी एक न चली। आखिरकार कांपती जुबान से किसान ने सारी बातें अपनी पत्नी को बताई।
भूखा प्यासा किसान बिचारा पूरे तन मन से काम में जुटा रहा। दोपहर बाद बहुत जोर से खन की आवाज आई। सब बहुत खुश हुए। उनमें से एक ने कहा लगता है। इस बार काफी बड़ा सिक्का हाथ लगा है पर जब किसान ने हाथ डालकर उसे निकालना चाहा तो वह सिक्का न होकर कुछ और ही था।
असल मे हुआ यूं था, कि जब किसान ने अपनी सारी व्यथा पत्नी को बताई। तो पहले तो उसकी पत्नी को गहरा धक्का लगा। मगर फिर वह हिम्मत रखते हुए। इस मुसीबत से बाहर निकलने की युक्ति सोचने लगी और फिर उन्होंने इस मुसीबत से निकलने के लिए एक योजना बनाई। किसान अपनी पत्नी की बीमारी का नाटक करके उनकी आंखों से एक दिन के लिए ओझल हो गया।


