हुनर पर प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Good And Bad Skill – On Inspirational Story In Hindi
रवि और किशन दोनों एक दूसरे के पड़ोसी थे । दोनों में काफी गहरी मित्रता भी थी । दोनों अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते जरूर थे परंतु घर आने के बाद सारा वक्त दोनों का साथ-साथ ही बितता था । साथ खेलना साथ पढ़ना बस स्कूल अलग-अलग जाना । कुछ ही दिनों बाद दोनों के इग्जाम शुरू हो गए ।
इग्जाम के बाद अब समय था । मौज मस्ती का दोनों धूप ढलते-ढलते अन्य दोस्तों के साथ क्रिकेट के मैदान में पहुंच जाते और फिर जब तक बाॅल दिखाई पड़ती तब तक उनका IPL चलता रहता । इन छुट्टीयों मे मौज-मस्ती तो बहुत थी । मगर एक प्रॉब्लम भी थी ।
छुट्टियों के इस मौसम में धूप बहुत कड़ाके की पड़ रही थी । ऐसे में शाम से पहले उनका घर से बाहर निकलना काफी मुश्किल था । मगर करें भी तो क्या करें एक दिन दोपहर में रवि, किशन के घर आया । उसके हाथ में एक छोटा सा बॉक्स था । किशन ने पूछा
“यह क्या है”
तो रवि ने बोला
“जस्ट टाइमपास यार”
“जस्ट टाइमपास यार”
किशन मुस्कुराते हुए
“टाइमपास ला मुझे दे जरा मैं भी तो देखूं यह तेरा टाइम पास क्या है ऐसा कहते हुए किशन ने रवि के हाथों से पैकेट खींच लिया उसने पैकेट खोला तो उसमें कार्ड थे”
किशन ने बोला
“कार्ड”
“कार्ड”
रवि ने कहा
“हां यार सुबह से बैठे-बैठे बोर हो जा रहा था सोचा क्या करें तो यह कार्ड खरीद लाया”
“अच्छा है” कहकर किशन अंदर चला गया थोड़ी देर में वह बाहर आया और फिर शुरू हुआ कार्ड का खेल मगर ये कार्ड का खेल उनके लिए क्रिकेट जैसा नहीं था क्योंकि दोनों ही इसमें बिल्कुल जीरो थे ।
मगर धीरे-धीरे दोनों ने इस गेम को काफी हद तक सीख लिया । अब तो दोनों को इस गेम में बहुत मज़ा भी आने लगा । छुट्टियों के दिन घर के दूसरे लोग भी उन दोनों के साथ गेम में हिस्सा लेने लगे । देखते ही देखते छुट्टियां खत्म हो गई ।
अब समय था नए सफर की शुरुआत का, नई कक्षा में जाने का, अब दोनों को कार्ड्स खेल कर टाइम पास करने की कोई जरूरत भी नहीं थी परंतु दोनों को इसकी लत लग गई थी ।
इसलिए वे रोज एक आध बार इस गेम को कभी घर तो कभी स्कूल में जरूर खेलते । धीरे-धीरे किशन गेम का मास्टर हो गया । रवि और किशन के मोहल्ले के समीप ही एक पुरानी बस्ती थी । जहां कुछ मजदूर टाइप के लोग रहा करते थे ।
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एक दिन जब वे दोनों वहां से गुजर रहे थे । तभी किसी ने उन दोनों को आवाज लगाई । दोनों ने पलट कर देखा तो पीछे उनकी पहचान का कोई नहीं था । पीछे कुछ लोग जरूर थे । मगर वह वही मजदूर लोग थे ।
जो जुआ खेलने में व्यस्त थे । दोनों वापस अपने गंतव्य को चल पड़े । तभी दोबारा वही आवाज फिर पीछे से आई । इस बार पीछे कोई और नहीं बल्कि उनका एक दोस्त खड़ा था जो उसी बस्ती का रहने वाला था ।
रवि ने कहा “तुम और यहां”
तब तक वह पुरानी बस्ती का लड़का वहां आ धमका और बोला
तब तक वह पुरानी बस्ती का लड़का वहां आ धमका और बोला
“देख किशन मैं बहुत बड़ी परेशानी में फंस गया हूं । घर से स्कूल फीस और ट्यूशन के लिए जो पैसा मिला था । उसे मैंने जुए में लगा दिया और उसमे से आधे पैसे मै हार चुका हूं । यह मेरा आखरी गेम चल रही है अगर यह गेम भी मैं हार जाता हूं तो मैं स्कूल की फीस भी मैनेज नहीं कर पाऊंगा प्लीज किशन अब तो तुम ही कुछ कर सकते हो”
उसकी बात सुनकर किशन चौक बड़ा अपनी ओर इशारा करते हुए किशन ने बोला “क्या मैं”
लड़का
“हां यार स्कूल में सब जानते हैं कि तू इस गेम का मास्टर है । अगर तू मेरी यह बची गेम खेलेगा तो मैं जरूर जीत जाऊंगा”
किशन हंसते हुए “तू पागल हो गया है”
लड़का “नहीं यार मैं सच कह रहा हूं”
किशन “इतने बड़े-बड़े लोगों से मैं कैसे जीतूगां”
लड़का “ये सब छोड़ तु बस एक बार खेल मुझे यकीन है तू ये गेम जरूर जितोगे”
आखिरकार किशन को उसकी बात माननी पड़ी । गेम स्टार्ट हो गई देखते ही देखते किशन वह हारी हुई गेम जीत गया । दोस्त ने किशन को हग कर लिया । उसके कहने पर किशन ने उनके साथ वहा दो और गेम खेली और उसमें भी जीत दर्ज की ।
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जिसकी वजह से उसके दोस्त को उसके पूरे पैसे वापस मिल गए और थोड़े पैसे बच भी गए । उससे उन तीनों ने थोड़ी मस्ती भी की ।
एक दिन रवि और किशन का वह दोस्त उनके पास आया । वह बहुत परेशान था । उसकी परेशानी पूछने पर उसने कुछ पैसों की तंगी बताई और किशन को उसके लिए एक बार फिर गेम खेलने को कहा ।
मगर किशन ने इस बार उसे साफ मना कर दिया । थोड़ी देर में वह सिसकियां लेने लगा । किशन को उसकी दशा पर बहुत तरस आया और उसकी हेल्प के लिए वो तैयार हो गया । इस बार दोस्त ने कुछ बड़े रिस्क उठाए और किशन के हुनर के बदौलत काफी बड़ी जीत दर्ज की ।
पुरानी बस्ती के सारे जुआरी उसका लोहा मान गए । मिले पैसों से तीनों ने कई दिनों तक काफी मस्ती की । थोड़े दिनों में जब पैसे खत्म हो गए तो अब उन्हें पैसों की कमी सताने लगी ।
कुछ दिन तक तो किशन ने अवॉइड किया परंतु ज्यादा दिन वह ऐसा नही कर सका और जुए के गेम में कूद पड़ा । अपने हुनर के बदौलत अब वह खूब कमाता दोस्तों में उसकी शानो-शौकत काफी बढ़ गई ।
एक दिन उसके दोस्त को एक कैसिनो का पता चला । जो काफी दूर था । दोनों ने वहां जाने का प्लान बनाया । संयोग से उनका स्कूल टूर भी वहीं जा रहा था । दोनों टूर के लिए स्कूल बस में जा पहुंचे ।
बस चल पड़ी जैसे ही बस जैसे ही रुकी दोनों खुद को छुप-छुपाकर वहां से निकल पड़े और कैसीनो जा पहुंचे । गेम में भाग लेने के लिए उन्होंने काफी पैसे जुटाए थे । गेम स्टार्ट हुआ कैसिनो के धुरंधरों को काफी देर तक अपना छोटा सा किशन मात देता रहा ।
परंतु उन चालबाजों के सामने ज्यादा देर वह टिक नहीं सका और आखिरकार वह सारे पैसे हार गया चूंकि यहां आने के लिए जुटाए पैसे बड़े-बड़े सूदखोरों के थे । जिनसे उन्होंने काफी ऊंचे ब्याज पर यह कर्ज लिया था । अब तो खाली हाथ वहां जाना जोखिम भरा था ।
“अब तो किशन की हालत धोबी के कुत्ते जैसी थी ।
जहां वो न घर का रहा और न ही घाट का
जहां वो न घर का रहा और न ही घाट का
उसका हुनर आज उसी को ले डूबा “


