एक महान विचारक ने कहा है कि , “शुरुआत अच्छी हो तो समझो आधा काम हो गया” मेरा ये मानना है कि “जो लोग सूर्योदय से पहले उठते हैं उनकी जिन्दगी में कभी अँधेरा नहीं होता” हम सभी जीवन में एक aim लेकर चलते हैं और उसको पूरा करने का हर संभव प्रयास करते हैं, अपने मकसद में कामयाब […]
जिंदगी का पत्ता पैर से रौंदे हुए घास फिर से उग आतें हैं, मगर हाथों से तोड़े पत्ते हमेशा बिखर जाते हैं, बिखरे पत्ते उठाने का काम शायद हीं कोई करता है मगर करीब आने वाले हमेशा पत्ते तोड़ जाते हैं, हवा के किसी झोंके से पत्ते आसमान छूतें हैं और कभी-कभी गर्त में गिर […]
एक छोटी सी चींटी रास्ते में जा रही थी। उसके घरौंदे को कुछ उदण्ड बच्चों ने तोड़ दिया था, इस कारण वह बहुत परेशान थी और वह किसी ऐसे आदमी की खोज में थी जो उसकी सहायता कर सके। गुड्डू मछुहारा राजा से मिलने उनके दरबार में जा रहा था। उसके पास मोतियों से भरे […]
Poet प्रेरणा गहलोत यह कविता प्रेरणा कुमारी द्वारा लिखी गई है | प्रेरणा कुमारी बेगूसराय, बिहार की रहने वाली है | समाज की बुराइयों पर कुठाराघात करना आपकी कविताओं की प्रमुख विशेषता है |
एक कसाई अपने घर में ही मुर्गे की दुकान चलाता, और मुर्गे का मांस बेचता। वह अपनी पत्नी को बहुत प्रेम करता, उसके तीन बेटे थे। दो बेटे तो थोड़े बड़े थे। जबकि तीसरा अभी सिर्फ डेढ़ माह का था। सबसे छोटे होने के कारण तीसरे बेटे को पति पत्नी दोनों […]
बहुत समय पहले एक लकड़ी व्यापारी के तीन लड़के थे। व्यापारी खुद तो पढ़ा लिखा नहीं था। मगर वह अपने तीनों बच्चों को शिक्षित करना चाहता था। क्योंकि शायद उसने अशिक्षा का दंश झेला था। इसलिए वह अपने तीनों बच्चों को पढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करता। वह […]
विंध्याचल पर्वत की तलहटी में कालीपुर नाम का एक छोटा सा गांव था। उस गांव में राधेश्याम नाम का एक किसान अपने छोटे से परिवार के साथ रहता था। राधेश्याम की पत्नी विनीता बहुत ही मृदु स्वभाव की विदुषी महिला थी। राधेश्याम और उनकी अर्धांगिनी दोनों ही माँ भगवती के परम उपासक थे। उनके दो […]
हँसता मुस्कुराता चेहरा, नाकाम वादों की इनायत है , कुछ पूरे हुए कुछ अधूरे रह गए , ऐसे ख़्वाबों की गुज़ारिश है , ना जाने किस मोड़ पे मिल जाए फिर , और मुँह मोड़ ले हम । Poet VANDANA LAL यदि आप के पास कोई कहानी, शायरी , कविता विचार या कोई जानकारी ऐसी है जो आप यहाँ प्रकाशित […]
*अधूरे सपने* वक्त ऐसा हो कि हाथ में तेरा हाथ हो सैर करें दुनिया की जब तू मेरे साथ हो सुना है कभी ना कभी होते हैं सपने पूरे पर मेरे तो कुछ सपने आज भी हैं अधूरे काश तू भी हमारा कभी कुछ यूं इंतजार करें याद कर हमें तू मिलने की आहे भरे […]
तकलीफ़ की पोटली प्रेरणा गहलोत की दर्द भरी कविता तकलीफ़ एक हो तो बताऊं तकलीफ़ की पोटली किस किस को दिखाऊं उठाए नहीं उठते हैं अब ये इसे और कहां तक ले जाऊं आने वाले ग़मो का इल्म नहीं है इसमें और क्या क्या छुपाऊं भारी तो पहले से हीं है इसे क्या और […]
